
अरुणदेव गौतम
पुलिस महानिदेशक
छत्तीसगढ़

दो विशेषताएं जो पुलिस प्रशासनिक सेवा में उच्च पद पर पहुंचने के लिए जरूरी हैं?
पहला, निष्पक्षता और संवैधानिक चेतना — कानून को व्यक्ति के प्रति नहीं, बल्कि न्याय के प्रति समर्पित रखना।
दूसरा, संकट-प्रबंधन की क्षमता — जटिल परिस्थितियों में शीघ्र, निर्णायक और मानवीय संवेदनशीलता से भरा निर्णय लेना।
दो बातें जिनसे आपको पुलिस प्रशासनिक सेवा में जाने की प्रेरणा मिली?
पहला, राष्ट्र-सेवा का संकल्प — समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सुरक्षा पहुंचाने की गहरी लालसा।
दूसरा, वर्दी में निहित गरिमा — जन-सेवा के माध्यम से व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने की अभिलाषा।
देश के दो आईपीएस जिनसे आप सर्वाधिक प्रभावित हैं?
पहला, श्री जूलियो रिबेरो — जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अडिग ईमानदारी और नेतृत्व की मिसाल कायम की।
दूसरा, श्री हेमंत करकरे — जिन्होंने कर्तव्य परम्परा को जीवन पर्यंत निभाया और देशहित में सर्वोच्च बलिदान दिया।
दो बातें जो आपकी पुलिस प्रशासनिक सेवा की आधार स्तंभ हैं?
पहला, संविधान और कानून का शासन — हर कार्रवाई का केंद्र बिंदु न्यायिक मर्यादा और नागरिक अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
दूसरा, जन-विश्वास — पुलिस-जनता के बीच विश्वास का सेतु ही असली कानून व्यवस्था का आधार है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए आपके मार्गदर्शन में मिली दो बड़ी सफलताएं?
पहला, सुरक्षा और विकास का समन्वय — नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, विद्युत और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर जनता को मुख्यधारा से जोड़ना।
दूसरा, सामूहिक आत्मसमर्पण और पुनर्वास — नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की नीति से बड़ी संख्या में उग्रवादियों का सामाजिक पुनर्गठन।
दो बातें जो आपको नाराज करती हैं?
पहला, भ्रष्टाचार — वर्दी का दुरुपयोग कर जन-विश्वास को तोड़ना।
दूसरा, अनुशासनहीनता — संगठन में लापरवाही और कर्तव्य-निर्वाह में शिथिलता।
दो बातें जिनमें आप विश्वास करते हैं?
पहला, कर्मयोग — परिणाम की चिंता किए बिना, कर्तव्य की पूर्ति में पूर्ण निष्ठा।
दूसरा, पारदर्शिता — निर्णय प्रक्रिया में खुलेपन और जवाबदेही से ही प्रशासनिक नैतिकता जीवित रहती है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के डीजीपी रूप में आपकी दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं?
पहला, समुदायिक पुलिसिंग — जन-भागीदारी से अपराध की रोकथाम और सामाजिक सौहार्द्र की स्थापना।
दूसरा, पुलिस का आधुनिकीकरण — तकनीकी क्षमता, बुद्धिशील अन्वेषण और कल्याणकारी प्रशासन।
दो संदेश जो छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी को आप देना चाहते हैं?
पहला, शिक्षा और कौशल — आत्मनिर्भर बनें, किंतु साथ ही समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करें।
दूसरा, राष्ट्र-निर्माण में भागीदारी — क्षेत्रीय अस्मिता को राष्ट्रीय एकता के साथ जोड़कर प्रगति के नए आयाम स्थापित करें।
अपने जीवन के दो निर्णय जिन पर आपको गर्व है?
पहला, आईपीएस सेवा का चुनाव — जन-सेवा को जीवन का ध्येय बनाना।
दूसरा, कभी भी ईमानदारी से समझौता न करना — चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आई हों, नैतिक मूल्यों पर अडिग रहना।

दो जीवनमूल्य जो आपको अपने माता-पिता से मिले हैं?
पहला, सत्य और निष्ठा — कठिन परिस्थितियों में भी सच्चाई का साथ न छोड़ना।
दूसरा, दया और सेवा-भाव — दूसरों के दुख में सहभागिता और सहायता की तत्परता।
छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के व्यक्तित्व की दो विशेषताएं जिनसे आप प्रभावित हैं?
पहला, जमीन से जुड़ा नेतृत्व — जनसाधारण की समस्याओं को निकटता से समझने और उनका समाधान करने की क्षमता।
दूसरा, विकास-समावेशी दृष्टिकोण — प्रदेश के सभी वर्गों और क्षेत्रों के समग्र उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता।
आपके प्रिय दो छत्तीसगढ़ी व्यंजन?
पहला, फरा — जो छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सरलता और स्वाद का प्रतीक है।
दूसरा, चिला — जो साधारण सी दिखने वाली इस चीज में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू समाई है।
छत्तीसगढ़ के दो पर्यटन स्थल जो आपको प्रभावित करते हैं?
पहला, चित्रकोट जलप्रपात — प्रकृति की अप्रतिम रचना, जो मन को शांति और विस्मय से भर देती है।
दूसरा, बस्तर का आदिवासी क्षेत्र — जहाँ प्राचीन संस्कृति, कला और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
दो संदेश जो आप प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को देना चाहते हैं?
पहला, न्याय और मानवाधिकार का संतुलन — कठोरता के साथ संवेदनशीलता का संगम ही सच्ची पुलिसिंग है।
दूसरा, निरंतर अध्ययन और आत्म-संयम — कानून,
तकनीक और समाज में हो रहे परिवर्तनों के साथ खुद को सदैव अद्यतन रखें।
अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मिले ऐसे दो अवार्ड जिन पर आपको गर्व है?
पहला, राष्ट्रपति पुलिस पदक — जो संगठन और समाज दोनों के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।
दूसरा, पुलिस विशिष्ट सेवा पदक — जो लंबे समय तक निरंतर और निस्वार्थ सेवा का मान्यता-चिह्न है।
दो इच्छाएं जो अभी अधूरी हैं?
मेरी पहली इच्छा है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी नागरिक—चाहे वह शहर में हो या सुदूर वनांचल में—अपने आपको सुरक्षित, सम्मानित और शासन की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करे।
दूसरी, पुलिस के प्रत्येक जवान और उसके परिवार को ऐसी सुविधाएं और सम्मान मिलें, जिसके वे अपने कठिन और समर्पित कर्तव्य के कारण वास्तविक रूप से हकदार हैं।
जीवन में सफलता के दो मूल मंत्र?
पहला, निरंतरता — सफलता अस्थायी विफलताओं से नहीं, बल्कि हार न मानने के संकल्प से मिलती है।
दूसरा, नैतिक अखंडता — चरित्र ही वह पूंजी है जो पद, प्रतिष्ठा और समय की परीक्षा में अविचल रहती है।









