भाजपा एक कार्यकर्ता आधारित, अनुशासित एवं पारदर्शी संगठन है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। इन्हीं विशेषताओं से प्रेरित होकर मैंने पार्टी से जुड़कर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।

अमरजीत सिंह छाबड़ा
अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग

अपने राजनैतिक कैरियर के प्रारंभ के बारे में बताईए, कहा से इसकी शुरूवात हुई और पहली जिम्मेदारी आपको क्या मिली?
मेरे राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन की शुरुआत विद्यार्थी जीवन से ही हुई। वर्ष 1993 में मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ा यहीं से संगठनात्मक कार्यों के माध्यम से समाज सेवा की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिला। विद्यार्थी परिषद में कार्य करते हुए राष्ट्रहित, और छात्रहित में अनेको आंदोलन किए। जेल की यात्राएं भी की। कई बार थाने में दिन दिन भर बैठाया गया, कश्मीर में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान को लेकर दुर्गा कालेज कैंपस में जबरदस्त प्रदर्शन गिरफ्तारी हुई। प्रारंभिक दौर में मुझे रायपुर महानगर मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई, जो मेरे लिए एक महत्वपूर्ण सीख और नेतृत्व की पहली सीढ़ी थी। इस दायित्व का निर्वहन करते हुए युवाओं को संगठित करना, विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करना तथा संगठन को मजबूत करने का कार्य किया।
इसके बाद संगठन ने मुझ पर विश्वास जताते हुए मुंबई अधिवेशन के दौरान रायपुर महानगर का अध्यक्ष, फिर प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विभिन्न दायित्वों का अवसर दिया। इस पूरी यात्रा में मेरा उद्देश्य सदैव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी समस्याओं के समाधान हेतु कार्य करना रहा है। आज भी वही सेवा, समर्पण और संगठन के संस्कार मेरी कार्यशैली की मूल प्रेरणा हैं।

भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने का निर्णय आपने क्यों लिया?
विद्यार्थी जीवन से ही मेरा झुकाव राष्ट्रहित और समाज सेवा की ओर रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से भाजपा की विचारधारा को समझने का अवसर मिला, जिसका राष्ट्र प्रथम, अंत्योदय एवं सबका साथ–सबका विकास–सबका विश्वास के मूल मंत्र ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। भाजपा एक कार्यकर्ता आधारित, अनुशासित एवं पारदर्शी संगठन है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। इन्हीं विशेषताओं से प्रेरित होकर मैंने पार्टी से जुड़कर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।

आप किस राजनैतिक शख्सियत से सर्वाधिक प्रभावित हैं और क्यों?
मैं शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के व्यक्तित्व से विशेष रूप से प्रभावित हूँ। भगत सिंह जी का त्याग और राष्ट्रभक्ति, अटल जी का मर्यादित एवं दूरदर्शी नेतृत्व, तथा मोदी जी का राष्ट्र प्रथम का दृष्टिकोण और कर्मठ कार्यशैली—ये सभी मेरे लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।
इन महान व्यक्तित्वों से मुझे राष्ट्रसेवा, समर्पण और सकारात्मक नेतृत्व की निरंतर प्रेरणा मिलती है।

छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? इस दौरान किन पदों पर आपने कार्य किया और क्या चुनौतियां रहीं?
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद तक पहुंचना मेरे लिए केवल एक पद प्राप्ति नहीं, बल्कि वर्षों के सतत संघर्ष, संगठनात्मक अनुभव और समाजसेवा के प्रति समर्पण का परिणाम है।
मेरे सार्वजनिक जीवन की शुरुआत विद्यार्थी काल में वर्ष 1993 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुई। छात्रहित और राष्ट्रहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए अनेक आंदोलनों में भाग लिया, जहां कई बार जेल यात्राएं और प्रशासनिक दबावों का सामना भी करना पड़ा। यही दौर मेरे व्यक्तित्व निर्माण और संघर्षशीलता की नींव बना।
इसके पश्चात मैंने विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वदेशी जागरण मंच में विविध दायित्व निभाते हुए स्वदेशी मेला जैसे बड़े आयोजनों में योगदान दिया। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स में कार्य करते हुए व्यापारिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा। साथ ही नवसृजन मंच की स्थापना कर सामाजिक क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए। “बिटिया जन्मोत्सव” जैसे आयोजनों के माध्यम से अब तक 10,000 से अधिक बेटियों का सम्मान किया गया, जो समाज में सकारात्मक सोच के प्रसार का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।
राजनीतिक जीवन में भारतीय जनता पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़ते हुए युवा मोर्चा से अपनी यात्रा प्रारंभ की। प्रदेश और जिला स्तर पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया, आंदोलनों और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में बसना विधानसभा प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए 36,793 मतों से ऐतिहासिक विजय सुनिश्चित कराने में योगदान दिया। वहीं लोकसभा चुनाव में महासमुंद क्षेत्र में मीडिया प्रभारी एवं बसना विधानसभा चुनाव प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए संगठन को मजबूत बढ़त दिलाई।
इसके अतिरिक्त राज्य युवा आयोग के सदस्य के रूप में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी कार्य करने का अवसर मिला, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ने का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
इस पूरे सफर में अनेक चुनौतियां भी सामने आईं—कभी संसाधनों की कमी, कभी वैचारिक संघर्ष, तो कभी संगठनात्मक दायित्वों के बीच संतुलन बनाना। कई बार विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन इन सबने मुझे और अधिक दृढ़ और प्रतिबद्ध बनाया।
अंततः इन्हीं अनुभवों, संघर्षों और समाज के प्रति निरंतर सेवा भाव के आधार पर मुझे छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली। यह मेरे लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे मैं पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास कर रहा हूं। यह यात्रा आज भी जारी है—समाज के हर वर्ग, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करना ही मेरा लक्ष्य है।

वर्तमान में आपके लिए प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?
“देश प्रथम” के भाव के साथ मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि अल्पसंख्यक समाज तक सरकार की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से और अधिक सशक्त रूप से जुड़ें। साथ ही समाज में विश्वास, संवाद और समरसता को मजबूत करना, राष्ट्रीय एकता की भावना को आगे बढ़ाना तथा प्रत्येक वर्ग की समस्याओं का त्वरित और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना मेरी प्रमुख जिम्मेदारियां और चुनौतियां हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के गरिमामयी पद के लिए आपका चयन किया। पार्टी के इस निर्णय पर आप क्या कहना चाहेंगे?
संगठन शीर्ष नेतृत्व द्वारा मुझे छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जैसे गरिमामयी पद के लिए चुना यह मेरे लिए अत्यंत सम्मान और गौरव का विषय है। मैं इसे व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि संगठन के प्रति वर्षों की निष्ठा, परिश्रम और समर्पण की मान्यता के रूप में देखता हूं।
पार्टी नेतृत्व ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उसके लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। भारतीय जनता पार्टी हमेशा कार्यकर्ताओं को उनके कार्य और प्रतिबद्धता के आधार पर अवसर देने में विश्वास रखती है, और मेरा चयन उसी परंपरा का एक उदाहरण है।
मैं यह भी मानता हूं कि यह पद केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। पार्टी की अपेक्षाओं और जनभावनाओं के अनुरूप कार्य करते हुए मैं अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और समग्र विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करूंगा। मेरी प्राथमिकता होगी कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, संवाद और विश्वास का वातावरण मजबूत हो तथा सभी समुदायों के बीच समरसता और सहयोग की भावना को और सुदृढ़ किया जा सके।
मैं पुनः भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए यह विश्वास दिलाता हूं कि मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ निभाने का हर संभव प्रयास करूंगा।

अपने अब तक के कार्यकाल में आपकी प्रमुख उपलब्धियां क्या हैं?
मेरे कार्यकाल में विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, समरसता और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। जैन संतों एवं साध्वियों के मंगल विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर सहयोग प्रदान किया गया।
“वीर बाल दिवस” के अवसर पर लगभग 8000 बच्चों, NSS–NCC एवं खिलाड़ियों के साथ ऐतिहासिक वीर बाल रैली का आयोजन किया गया। जैन समाज के आचार्य टोडरमल जी के योगदान पर विचार गोष्ठी आयोजित कर वैचारिक जागरूकता बढ़ाई गई।
अल्पसंख्यक छात्रों के लिए 50 सीटर हॉस्टल का उद्घाटन, बुद्ध पूर्णिमा पर भारतीय बौद्ध महासभा के साथ भव्य आयोजन तथा श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी शताब्दी पर 30,000 विद्यार्थियों के बीच निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से उनके गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने जैसे कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख कार्य क्या हैं?
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग का मुख्य कार्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा, उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान तथा शासन की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना है। सबसे अधिक फोकस इस बात पर रहता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सुरक्षा और विकास की योजनाएं प्रभावी रूप से पहुंचे, साथ ही समुदायों के बीच संवाद, विश्वास और समरसता को मजबूत किया जा सके।
आपको फैसले लेने की कितनी स्वतंत्रता प्राप्त है?
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोग को अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप पर्याप्त स्वतंत्रता प्रदान की गई है, जिससे हम निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। नीतिगत दिशा-निर्देशों के अंतर्गत रहते हुए हम अल्पसंख्यक समुदायों की समस्याओं पर निर्णय लेने, सुझाव देने और उनके हित में पहल करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा और विकास सुनिश्चित किया जा सके।

संघर्ष के दौरान परिवार का साथ कैसा रहा?
मैंने एक सामान्य परिवार में जन्म लिया और माता-पिता को जीवन भर संघर्ष करते देखा। कठिन परिस्थितियों में भी उनका अडिग रहना मेरे लिए सबसे बड़ी सीख रही। आज मैं जो भी हूं, वह उनके संस्कार, शिक्षा और मार्गदर्शन का ही परिणाम है। परिवार का यही सहयोग और प्रेरणा मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
आपकी पहली प्राथमिकता क्या है—राजनीति या समाज सेवा?
मेरे लिए राजनीति और समाजसेवा अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। मेरी पहली प्राथमिकता हमेशा समाजसेवा ही रही है, और राजनीति को मैं उसी का एक प्रभावी माध्यम मानता हूं।
अपनी सफलताओं का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
मेरी अब तक की सभी सफलताओं का श्रेय मैं अपने माता-पिता के संस्कार, परिवार के सहयोग, संगठन के मार्गदर्शन और कार्यकर्ताओं के समर्पण को देता हूं। साथ ही वाहेगुरु जी की कृपा और समाज के आशीर्वाद ने भी मुझे निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
अपने राजनैतिक आलोचकों के लिए क्या कहना चाहेंगे?
लोकतंत्र में आलोचना एक महत्वपूर्ण और आवश्यक हिस्सा है। मैं सकारात्मक और रचनात्मक आलोचनाओं को सुधार का अवसर मानता हूं। जहां सुझाव होते हैं, उन्हें स्वीकार कर कार्यशैली में सुधार करता हूं, और जहां केवल निराधार आरोप होते हैं, वहां संयम और तथ्यों के साथ जवाब देना ही उचित समझता हूं।
छत्तीसगढ़ के सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आपका संदेश क्या है?
“Nation First – देश प्रथम” के भाव के साथ मेरा सभी अल्पसंख्यक समुदायों से आग्रह है कि वे शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। आपसी भाईचारे, विश्वास और समरसता को मजबूत करते हुए हम सभी मिलकर एक सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण करें।









